नेहरू-गाँधी के फेबियन समाजवाद को नरसिम्हा राव की खुली अर्थव्यवस्था निगल रही थी।
2.
बाद कि दौर में भारत के बौद्धिक समुदाय पर फेबियन समाजवाद, अराजकतावाद, मार्क्सवाद-लेनिनवाद, सामाजिक जनवाद और नाजीवाद का भी प्रभाव परिलक्षित हुआ.
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बाद कि दौर में भारत के बौद्धिक समुदाय पर फेबियन समाजवाद, अराजकतावाद, मार्क्सवाद-लेनिनवाद, सामाजिक जनवाद और नाजीवाद का भी प्रभाव परिलक्षित हु आ.
4.
अम्बेडकर की ‘ इण्डिपेण्डेण्ट लेबर पार्टी ' कोई लाल झण्डे वाली पार्टी नहीं थी, बल्कि अम्बेडकर पर फेबियन समाजवाद के प्रभाव का नतीजा थी, जिसका मार्क्सवाद से ताल्लुक नहीं है।
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संसोधनवादी समाजवाद ओर फेबियन समाजवाद के दो सबसे बड़े प्रयोग स्थल जहाँ क्रमषः सोषल डेमोक्रेटिक और ब्रिटिष लेबर पार्टी ने बीसवीं शताब्दी के कुछ साहसिक सुधारवादी प्रयोग किये थे, दिवंगत मार्गरेट थैचर और एंजेला मर्केल के आक्रामक पूँजीवादी पहल के सामने आत्म समर्पण की मुद्रा में हैं।
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संसोधनवादी समाजवाद ओर फेबियन समाजवाद के दो सबसे बड़े प्रयोग स्थल जहाँ क्रमषः सोषल डेमोक्रेटिक और ब्रिटिष लेबर पार्टी ने बीसवीं शताब्दी के कुछ साहसिक सुधारवादी प्रयोग किये थे, दिवंगत मार्गरेट थैचर और एंजेला मर्केल के आक्रामक पूँजीवादी पहल के सामने आत्म समर्पण की मुद्रा में हैं।